यूं ही.......
आज यूं ही लिखने का मन किया
कुछ खास नहीं न ही कुछ आम
बस इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से कुछ लम्हे चुराने का मन किया
लिखने के लिए विषय बहुत से हैं लेकिन लिखने भर से क्या सब ठीक हो जाएगा ??
क्या उन् घर के नल्को में पानी आ जायेगी?
क्या उन् प्यासी सूरतो में वो हंसी आ जाएगी ?
शायद नहीं.....
लेकिन फिर भी लिखना मेरी नियति है
और
एक सोच
शायद ये परिदृश्य बदल जाए
शायद....
और जिस दिन ये बदल जाएगा
उस दिन मेरा लिखना कुछ काम आ जायेगा
रातो को जागकर सुबह लिखना
कुछ पलों को अपनी डायरी में उकेरना
शायद...जी हाँ शायद...
कुछ खास नहीं न ही कुछ आम
बस इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से कुछ लम्हे चुराने का मन किया
लिखने के लिए विषय बहुत से हैं लेकिन लिखने भर से क्या सब ठीक हो जाएगा ??
क्या उन् घर के नल्को में पानी आ जायेगी?
क्या उन् प्यासी सूरतो में वो हंसी आ जाएगी ?
शायद नहीं.....
लेकिन फिर भी लिखना मेरी नियति है
और
एक सोच
शायद ये परिदृश्य बदल जाए
शायद....
और जिस दिन ये बदल जाएगा
उस दिन मेरा लिखना कुछ काम आ जायेगा
रातो को जागकर सुबह लिखना
कुछ पलों को अपनी डायरी में उकेरना
शायद...जी हाँ शायद...
Comments
kisi ki soch me
ya kisi ki yaad me
bas yun hi