सोच
जिस्म का दिल से अगर वास्ता नहीं होता
कसम खुदा की कोई हादसा नहीं होता.
वे लोग जाएँ कहाँ बोलिए खड़े हैं जो
उस हद्द के बाद जहाँ रास्ता नहीं होता
सूने कमरे में कैलेंडर सा फड़फड़ाता है
वह दर्द जिसका कोई हमज़बाँ नहीं होता
सिर्फ चेहरा ही नहीं शकसियत भी पहचानो
जिसमे दिखता है वही आइना नहीं होता
सुना है हमने शोर में,शहर के लोगो से
जहाँ अनुराग नहीं वहां काफिला नहीं होता.
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It's a good one. Kafi deep hai par great going brother...