आकान्च्छा
देखता हूँ राह तेरा रोज़ रात आओगे
परियों की देश की तुम कहानियां सुनाओगे
धीरे-धीरे चुपके चुपके मीठी मीठी लोरियों से
गीतों का गुंजन कर,गीत तुम सिखाओगे.
हलकी-हलकी थाप देकर
लोरियों की लाये पर ही
सच्ची-झूठी ख्वाबों की
निदियाँ तुम लाओगे
हफ्ते-दिन बीत गए
आँखों ही आँखों मै
खट्टे-मीठे सपनो की
झाड़ियाँ न लाओगे
बार-बार कतराकर
बादलों की ओटों मै
इठला कर तड़पाकर
लुक चिप जाते तुम
अब चन्दा आ जाओ
मन को तडपाओ मत
सपनो की दुनिया में
मुझको ले जाओ तुम.
A.Bhattacharya
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keep writing.....